The Glory of War
युद्ध का गौरव ( The Glory of War)
- डी. के. पाटकर
- D. K. Patkar
अगर जंग में जख्म नहीं खाये तो जंग कैसी ,
अगर ज़िन्दगी में मारे नहीं गए तो ज़िन्दगी कैसी ।
दर्द को हथियार बनाकर जंग लड़ तू ,
क्योंकि जीत भी तुझे कई जख्म देगी ।
बहते रक्त से लिख अपने अस्तित्व की कहानी,
क्योंकि ज़िन्दगी में हर वक्त ऐसी जंग होगी ।
सोच न ये एक पल भी , युद्ध ये थम जायेगा ,
समर ये थम गया तो , वक्त भी थम जायेगा ।
शस्त्र तेरी प्रीत होगी , मृत्यु तेरी मीत होगी ,
इस समर में , अंत तक लड़ने वाले की ही जीत होगी ।
" हृदय में दम लगाकर जोर से हुंकार भर ,
अपनी गर्जना से तू शत्रुओं का प्रतिकार कर ,
रक्त से अपने मातृभूमि का श्रृंगार कर ,
नभ को भी जो चीर दे ऐसी तू ललकार कर , "
मृत्यु भी थर्रा उठे , ऐसी तेरी ध्वनि होगी ,
काल भी मिटा न सके , ऐसी तेरी छवि होगी ।
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