unknown
वो अभी भी काजल लगाती होगी...
वो अभी भी पायल पहनती होगी...
वो अभी भी पायल पहनती होगी...
उसके चेहरे पर वो मासूम मुस्कराहट...
अभी भी जीना सिखाती होगी...
अभी भी जीना सिखाती होगी...
छुपकर जब वो दुनिया से...
किसी परीलोक में खो जाती होगी...
किसी परीलोक में खो जाती होगी...
अपनी बचकानी हरकतों से वो...
अभी भी सबको हंसाती होगी...
अभी भी सबको हंसाती होगी...
घर से जब वो बाहर जाती होगी...
तो मौसी की कुतिया उसे पिछियाती होगी...
तो मौसी की कुतिया उसे पिछियाती होगी...
शायद उसे भी मेरी याद आती होगी...
शायद वो भी विरह की पंक्तियों से कविता सजाती होगी...
written by- @dkpatkar
शायद वो भी विरह की पंक्तियों से कविता सजाती होगी...
written by- @dkpatkar
Comments
Post a Comment