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 नहीं लुभाती मुझे  चांद चौकड़ी
नहीं लुभाता मधुर भ्रमर
नहीं लुभाती कोमल काया
नहीं लुभाता नभ अम्बर
नहीं लुभाती विद्युत दामिनी
नहीं लुभाता शीतल जल
नहीं लुभाती ज्वाला अग्नि
नहीं लुभाता पर्वत हिमदल
नयन पाश से बांधा तुमने
भूल गए हैं जीवन कल
हमे लुभाती बस प्रीत तुम्हारी
जिसमे है जीवन का हल ।

#dk

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