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शाम को छत पर बैठकर जब आप शांति से चाय पी रहे होते हैं एक तन्हाई भरे माहौल में दुनिया के शोरगुल से दूर तब आप क्या सोचते हैं कि आज अपने फेसबुक वॉल पर क्या पोस्ट करूं कौन से मित्र को मैसेज करूं या फिर किसी को कॉल करूं तो फिर कभी लगता है कि शांति ही ठीक है या फिर हमें पता ही नहीं होता है कि हमारे लिए सही क्या है
कभी लगता है मानो जिंदगी की रेस में काफी आगे निकल आए हो कभी लगता है जैसे बहुत सी चीजें पीछे छूट गई है
मगर हम कर भी क्या सकते हैं आखिर जीवन हमें बहुत सारे विकल्प पर भी तो नहीं देता चाय के हर एक घूंट के साथ आप अपने मन के अंदर चल रहे विचारों  के उतार-चढ़ाव से गुजरते हैं
कभी आप कोशिश करते हैं खुद को समझाने की जो कुछ चल रहा है वह सब सही है,
और काफी हद तक आप सफल भी होते हैं
हर एक चुस्कीके साथ चाय खत्म हो रही होती है
और एक हल्की सी अशांति आपके मन को घेरने लगती है और आप लौटने लगते हैं उसी माहौल में जिससे बचने के लिए आप छत पर आए थे,
और सब कुछ पहले जैसा हो जाता है,
हम बस उम्मीद कर सकते हैं इसे एक नया दिन आएगा फिर एक शाम होगी फिर हम वैसे ही चाय पिएंगे फिर उन्हीं भूली बिसरी यादों को याद करेंगे यह जानते हुए कि भी हम हालातों को नहीं बदल सकते हम लगातार कोशिश करते रहते हैं उन्हें अपनाने की,
शाम खत्म होने को होती है और रात आ रही होती है और जीवन यूं ही चलता रहता है।

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